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mahabharat 5.167.31: युद्ध को देखकर उनके मन में किसी प्रकार का भय या विषाद नहीं होता। वे रथ के मार्ग में खड़े शत्रुओं पर हंसते हुए कूद पड़ते हैं।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.167.31 
एतस्य समरं दृष्ट्वा न व्यथास्ति कथञ्चन।
उत्स्मयन्नुत्पतत्येष परान् रथपथे स्थितान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
युद्ध को देखकर उनके मन में किसी प्रकार का भय या विषाद नहीं होता। वे रथ के मार्ग में खड़े शत्रुओं पर हंसते हुए कूद पड़ते हैं।॥31॥
 
On seeing the battle, there is no fear or sadness in their mind. They jump laughingly on the enemies standing in the path of the chariot. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)