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mahabharat 5.167.2: युद्ध में शत्रुओं का वीरतापूर्वक सामना करने वाली इस शकुनि की सेना भयंकर है। इसका वेग वायु के समान है और यह नाना प्रकार के आकार वाले अनेक अस्त्र-शस्त्रों से सुशोभित है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.167.2 
एतस्य सेना दुर्धर्षा समरे प्रतियायिन:।
विकृतायुधभूयिष्ठा वायुवेगसमा जवे॥ २॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में शत्रुओं का वीरतापूर्वक सामना करने वाली इस शकुनि की सेना भयंकर है। इसका वेग वायु के समान है और यह नाना प्रकार के आकार वाले अनेक अस्त्र-शस्त्रों से सुशोभित है॥ 2॥
 
The army of this Sakuni who bravely faces the enemies in the war is fierce. Its speed is like the wind and it is adorned with many weapons of various shapes.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)