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mahabharat 5.167.15: वे समस्त अभिषिक्त राजाओं के गुरु और ज्येष्ठ गुरु हैं। वे संजयवंश के क्षत्रियों का नाश करेंगे; किन्तु अर्जुन उन्हें अत्यंत प्रिय हैं ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.167.15 
सर्वमूर्धाभिषिक्तानामाचार्य: स्थविरो गुरु:।
गच्छेदन्तं सृंजयानां प्रियस्त्वस्य धनंजय:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे समस्त अभिषिक्त राजाओं के गुरु और ज्येष्ठ गुरु हैं। वे संजयवंश के क्षत्रियों का नाश करेंगे; किन्तु अर्जुन उन्हें अत्यंत प्रिय हैं ॥15॥
 
He is the teacher and the elder Guru of all the anointed kings. He will destroy the Kshatriyas of the Sanjaya dynasty; but Arjuna is very dear to him. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)