श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 166: कौरवपक्षके रथियोंका परिचय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.166.21 
गौतमस्य महर्षेर्य आचार्यस्य शरद्वत:।
कार्तिकेय इवाजेय: शरस्तम्बात् सुतोऽभवत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
गौतम वंश के महर्षि आचार्य शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य कार्तिकेय के समान सरकण्डों से उत्पन्न हुए हैं और उन्हीं के समान अजेय भी हैं ॥21॥
 
Kripacharya, son of Maharshi Acharya Sharadwan of the Gautama lineage, was born from reeds like Kartikeya and is also invincible like him. ॥21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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