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श्लोक 5.166.16  |
रथौ तौ कुरुशार्दूल मतौ मे रथसत्तमौ।
क्षत्रधर्मरतौ वीरौ महत् कर्म करिष्यत:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| कुरुश्रेष्ठ! वे दोनों न केवल वीर रथी हैं, अपितु रथियों में भी श्रेष्ठ हैं। वे क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए युद्ध में महान पराक्रम करेंगे। 16॥ |
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| Kurushrestha! Both of them are not only brave charioteers, they are also the best among charioteers. They will perform great feats in battle by practicing Kshatriya Dharma. 16॥ |
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