Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.165.7: राजन! इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैं अब शक्ति को अपने हाथों में धारण करने वाले देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय को प्रणाम करके आपकी सेना का सेनापति बनूँगा॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.165.7 
नमस्कृत्य कुमाराय सेनान्ये शक्तिपाणये।
अहं सेनापतिस्तेऽद्य भविष्यामि न संशय:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैं अब शक्ति को अपने हाथों में धारण करने वाले देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय को प्रणाम करके आपकी सेना का सेनापति बनूँगा॥7॥
 
King! There is no doubt that I will now become the commander of your army after saluting Kumar Kartikeya, the commander of the gods who holds power in his hands. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)