Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.165.32: उस समय उन्होंने घोर तपस्या करके पाण्डवों का युद्ध में सामना करने का दुर्लभ वरदान प्राप्त किया था।   |   mahabharat अध्याय 5.165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.165.32 
एतेन हि तदा राजंस्तप आस्थाय दारुणम्।
सुदुर्लभो वरो लब्ध: पाण्डवान् योद्‍धुमाहवे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन्होंने घोर तपस्या करके पाण्डवों का युद्ध में सामना करने का दुर्लभ वरदान प्राप्त किया था।
 
At that time, by performing severe penance, he had obtained the rare boon of being able to face the Pandavas in battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)