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mahabharat 5.165.31: हे पुरुषों! द्रौपदी के चीर हरण के समय पाण्डवों ने उसे बहुत कष्ट पहुँचाया था। उस महान कष्ट का स्मरण करके शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाला जयद्रथ अवश्य ही युद्ध करेगा॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.165.31 
द्रौपदीहरणे राजन् परिक्लिष्टश्च पाण्डवै:।
संस्मरंस्तं परिक्लेशं योत्स्यते परवीरहा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषों! द्रौपदी के चीर हरण के समय पाण्डवों ने उसे बहुत कष्ट पहुँचाया था। उस महान कष्ट का स्मरण करके शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाला जयद्रथ अवश्य ही युद्ध करेगा॥31॥
 
O lord of men! At the time of Draupadi's abduction, the Pandavas had inflicted a lot of pain on him. Remembering that great pain, Jayadratha, the destroyer of enemy warriors, will surely fight. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)