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mahabharat 5.165.26-27h: मैं महान धनुर्धर मद्रराज शल्य को भी अतिरथी मानता हूँ, जो प्रत्येक युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण के साथ प्रतिस्पर्धा करते रहते हैं ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 5.165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  5.165.26-27h 
मद्रराजो महेष्वास: शल्यो मेऽतिरथो मत:॥ २६॥
स्पर्धते वासुदेवेन नित्यं यो वै रणे रणे।
 
 
अनुवाद
मैं महान धनुर्धर मद्रराज शल्य को भी अतिरथी मानता हूँ, जो प्रत्येक युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण के साथ प्रतिस्पर्धा करते रहते हैं ॥26॥
 
I also consider the great archer Madraraja Shalya as an Atirathi, who always competes with Lord Krishna in every battle. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)