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श्लोक  5.165.14 
भवद्भॺां पुरुषाग्रॺाभ्यां स्थिताभ्यां विजये मम।
न दुर्लभं कुरुश्रेष्ठ देवराज्यमपि ध्रुवम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! जब आप दोनों परम पराक्रमी पुरुष मेरी विजय के लिए यहाँ खड़े होंगे, तब निश्चय ही देवताओं का राज्य भी मेरे लिए कठिन नहीं होगा।
 
O best of the Kurus! When both of you, the most valiant men, are standing here for my victory, then certainly even the kingdom of the gods will not be difficult for me. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)