श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.163.54 
कैतव्यस्य तु तद् वाक्यं निशम्य भरतर्षभ:।
दु:शासनं च कर्णं च शकुनिं चापि भारत॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उलूक की वह बात सुनकर भरतश्रेष्ठ दुर्योधन ने दु:शासन, कर्ण तथा शकुनि से कहा- 54॥
 
India Hearing that statement of Uluka, Duryodhana, the best of Bharat, said to Dushasana, Karna and Shakuni - 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)