श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  5.163.49-50h 
तवैव दोषाद् दुर्बुद्धे सर्वमेतत् त्वनावृतम्।
स गच्छ मा चिरं तात उलूक यदि मन्यसे॥ ४९॥
इह वा तिष्ठ भद्रं ते वयं हि तव बान्धवा:।
 
 
अनुवाद
"परन्तु हे मूर्ख! यह सब तेरे ही दोष से हुआ है। पिता उल्लू! यदि तेरी इच्छा हो, तो शीघ्र ही यहाँ से चला जा। अथवा तेरा कल्याण हो, यहीं रह; क्योंकि हम भी तेरे भाई और सम्बन्धी हैं।" ॥49 1/2॥
 
"But you fool! All this has happened because of your own fault. Father Owl! If you wish, go away soon. Or may it be good for you, stay here; because we are also your brothers and relatives." ॥ 49 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)