Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.163.48: तत्पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने करुणावश पुनः यह महत्त्वपूर्ण बात कही - 'हे राजन! मैं किसी भी स्थिति में अपने परिवार के सदस्यों का वध नहीं चाहता। | mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने करुणावश पुनः यह महत्त्वपूर्ण बात कही - 'हे राजन! मैं किसी भी स्थिति में अपने परिवार के सदस्यों का वध नहीं चाहता।
Thereafter, Dharmaraja Yudhishthira, out of compassion, again said this important thing - 'O King! I do not want my family members to be killed under any circumstances.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥