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mahabharat 5.163.45-46: इसके बाद धृष्टद्युम्न ने कित्वपुत्र उलूक से भी यह कहा - 'उलूक! तुम राजकुमार दुर्योधन से यह कहो कि मैं द्रोणाचार्य को उनके अनुयायियों और सम्बन्धियों सहित मार डालूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  5.163.45-46 
धृष्टद्युम्नोऽपि कैतव्यमुलूकमिदमब्रवीत्॥ ४५॥
सुयोधनो मम वचो वक्तव्यो नृपते: सुत:।
अहं द्रोणं हनिष्यामि सगणं सहबान्धवम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद धृष्टद्युम्न ने कित्वपुत्र उलूक से भी यह कहा - 'उलूक! तुम राजकुमार दुर्योधन से यह कहो कि मैं द्रोणाचार्य को उनके अनुयायियों और सम्बन्धियों सहित मार डालूँगा।'
 
After this Dhrishtadyumna also said this to Kitva's son Ulooka - 'Ulooka! You tell this to prince Duryodhana that I will kill Dronacharya along with his followers and relatives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)