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mahabharat 5.163.44-45h: ‘निश्चय ही महाबुद्धिमान विधाता ने मुझे भीष्म का वध करने के लिए उत्पन्न किया है। अतः मैं समस्त धनुर्धरों के समक्ष भीष्म का वध करूँगा।’॥44॥   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  5.163.44-45h 
अहं भीष्मवधात् सृष्टो नूनं धात्रा महात्मना॥ ४४॥
सोऽहं भीष्मं हनिष्यामि मिषतां सर्वधन्विनाम्।
 
 
अनुवाद
‘निश्चय ही महाबुद्धिमान विधाता ने मुझे भीष्म का वध करने के लिए उत्पन्न किया है। अतः मैं समस्त धनुर्धरों के समक्ष भीष्म का वध करूँगा।’॥44॥
 
‘Surely the great-minded creator has created me to kill Bhishma. Therefore, I will kill Bhishma in front of all the archers.’॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)