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mahabharat 5.163.41: तत्पश्चात् वृद्ध राजा विराट और द्रुपद ने उलूक से इस प्रकार कहा - 'उलूक ! तुम दुर्योधन से कहो, राजन ! हम दोनों का विचार सदैव यही रहता है कि हमें साधु पुरुषों का दास बनना चाहिए। हम दोनों, विराट और द्रुपद, दास हैं या दासी; इसका निर्णय युद्ध में किए गए पुरुषार्थ को देखकर होगा ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.163.41 
विराटद्रुपदौ वृद्धावुलूकमिदमूचतु:।
दासभावं नियच्छेव साधोरिति मति: सदा।
तौ च दासावदासौ वा पौरुषं यस्य यादृशम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वृद्ध राजा विराट और द्रुपद ने उलूक से इस प्रकार कहा - 'उलूक ! तुम दुर्योधन से कहो, राजन ! हम दोनों का विचार सदैव यही रहता है कि हमें साधु पुरुषों का दास बनना चाहिए। हम दोनों, विराट और द्रुपद, दास हैं या दासी; इसका निर्णय युद्ध में किए गए पुरुषार्थ को देखकर होगा ॥41॥
 
Thereafter, old King Virat and Drupada said to Uluka thus – ‘Uluka! You tell Duryodhana, king! The thought of both of us is always that we should become slaves of saintly men. Both of us, Virat and Drupada, are slaves or slaves; This will be decided by looking at the efforts that one makes in the war. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)