Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.163.4: जो दूसरों के बल और पराक्रम का आश्रय लेकर अपने शत्रुओं को युद्ध के लिए बुलाता है, वह संसार में पुण्यात्मा कहलाता है, क्योंकि वह क्षत्रिय होने के योग्य नहीं है ॥4॥ | mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परवीर्यं समाश्रित्य य: समाह्वयते परान्।
क्षत्रबन्धुरशक्तत्वाल्लोके स पुरुषाधम:॥ ४॥
अनुवाद
जो दूसरों के बल और पराक्रम का आश्रय लेकर अपने शत्रुओं को युद्ध के लिए बुलाता है, वह संसार में पुण्यात्मा कहलाता है, क्योंकि वह क्षत्रिय होने के योग्य नहीं है ॥4॥
He who calls his enemies to war by relying on the strength and valour of others is known in the world as a virtuous man because he is incapable of being a Kshatriya. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥