Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.163.3: जो अपने बल और पराक्रम पर भरोसा करके अपने शत्रुओं को चुनौती देता है और उनसे निर्भय होकर लड़ता है, उसे पुरुष कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.163.3 
स्ववीर्यं य: समाश्रित्य समाह्वयति वै परान्।
अभीतो युध्यते शत्रून् स वै पुरुष उच्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जो अपने बल और पराक्रम पर भरोसा करके अपने शत्रुओं को चुनौती देता है और उनसे निर्भय होकर लड़ता है, उसे पुरुष कहते हैं।
 
He who, relying on his own strength and valour, challenges his enemies and fights with them fearlessly is called a man. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)