श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  5.163.29-30h 
मम विप्रियकर्तारं कैतव्य ब्रूहि कौरवम्॥ २९॥
श्रुतं वाक्यं गृहीतोऽर्थो मतं यत् ते तथास्तु तत्।
 
 
अनुवाद
उल्लू! तुम मुझसे घृणा करने वाले दुर्योधन से कहो - 'मैंने तुम्हारा संदेश सुन लिया है और उसका अर्थ समझ लिया है। जैसी तुम्हारी इच्छा हो, वैसा ही हो।'
 
Owl! You tell Duryodhan who dislikes me - 'I have heard your message and understood its meaning. Let it be as you wish.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)