स त्वं कामपरीतात्मा मूढभावाच्च कत्थसे।
तथैव वासुदेवस्य न गृह्णासि हितं वच:॥ २८॥
अनुवाद
परन्तु तेरा मन तो लोभ और कामना में डूबा हुआ है। अपनी मूर्खता के कारण तू अपनी झूठी प्रशंसा कर रहा है और भगवान श्रीकृष्ण के हितकारी वचनों को भी नहीं सुन रहा है॥ 28॥
‘But your mind is drowned in greed and desire. Due to your foolishness you are falsely praising yourself and are not even listening to the beneficial words of Lord Krishna.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥