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mahabharat 5.163.28: परन्तु तेरा मन तो लोभ और कामना में डूबा हुआ है। अपनी मूर्खता के कारण तू अपनी झूठी प्रशंसा कर रहा है और भगवान श्रीकृष्ण के हितकारी वचनों को भी नहीं सुन रहा है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.163.28 
स त्वं कामपरीतात्मा मूढभावाच्च कत्थसे।
तथैव वासुदेवस्य न गृह्णासि हितं वच:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु तेरा मन तो लोभ और कामना में डूबा हुआ है। अपनी मूर्खता के कारण तू अपनी झूठी प्रशंसा कर रहा है और भगवान श्रीकृष्ण के हितकारी वचनों को भी नहीं सुन रहा है॥ 28॥
 
‘But your mind is drowned in greed and desire. Due to your foolishness you are falsely praising yourself and are not even listening to the beneficial words of Lord Krishna.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)