श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.163.27 
एतदर्थं मया तात पञ्च ग्रामा वृता: पुरा।
कथं तव सुदुर्बुद्धे न प्रेक्षे व्यसनं महत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘पिताजी! इसीलिए तो मैंने पहले पाँच गाँव ही माँगे थे। हे मूर्ख! मेरा उद्देश्य केवल इतना था कि मैं तुझ पर कोई बड़ी विपत्ति न देखूँ॥ 27॥
 
‘Father! That is why I had asked for only five villages earlier. Foolish one! My only purpose in doing so was that I should not see any great calamity befall you.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)