श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.163.26 
न चाहं कामये पापमपि कीटपिपीलयो:।
किं पुनर्ज्ञातिषु वधं कामयेयं कथंचन॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मैं तो कीड़े-मकोड़ों और चींटियों को भी हानि नहीं पहुँचाना चाहता; फिर मैं अपने भाई-बन्धुओं को कैसे मारना चाह सकता हूँ ?॥26॥
 
‘I do not wish to harm even insects and ants; then how can I wish to kill my brothers or relatives?॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)