श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.163.25 
स्वेन वृत्तेन मे वृत्तं नाधिगन्तुं त्वमर्हसि।
उभयोरन्तरं वेद सूनृतानृतयोरपि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सुयोधन! तुम अपने आचरण के अनुसार मेरे आचरण का निर्णय मत करो। मैं दोनों के आचरण का तथा सत्य और असत्य का भेद भी जानता हूँ॥ 25॥
 
Suyodhan! You should not judge my conduct according to your conduct. I understand the difference between the behaviour of both and also between truth and lie.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)