Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.163.12: इसीलिए तुम इतने अभिमानी हो कि अपने ऊपर आए हुए वर्तमान संकट को देख नहीं पा रहे हो। इसलिए मैं सबसे पहले तुम्हारी सेना में प्रवेश करके तुम्हारे सामने ही कुरुवंश के सबसे वृद्ध पुरुष भीष्म का वध करूँगा॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स दर्पपूर्णो न समीक्षसे त्व-
मनर्थमात्मन्यपि वर्तमानम्।
तस्मादहं ते प्रथमं समूहे
हन्ता समक्षं कुरुवृद्धमेव॥ १२॥
अनुवाद
इसीलिए तुम इतने अभिमानी हो कि अपने ऊपर आए हुए वर्तमान संकट को देख नहीं पा रहे हो। इसलिए मैं सबसे पहले तुम्हारी सेना में प्रवेश करके तुम्हारे सामने ही कुरुवंश के सबसे वृद्ध पुरुष भीष्म का वध करूँगा॥ 12॥
That is why you are so arrogant that you fail to see the present danger that has befallen you. So, I will first enter your army and kill the oldest man of the Kuru clan, Bhishma, right in front of your eyes.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥