श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.163.10-11 
यद् वाब्रवीद् वाक्यमदीनसत्त्वो
मध्ये कुरून् हर्षयन् सत्यसंध:।
अहं हन्ता सृञ्जयानामनीकं
शाल्वेयकांश्चेति ममैष भार:॥ १०॥
हन्यामहं द्रोणमृतेऽपि लोकं
न ते भयं विद्यते पाण्डवेभ्य:।
ततो हि ते लब्धतमं च राज्य-
मापद्‍गता: पाण्डवाश्चेति भाव:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सत्यवादी एवं महापराक्रमी भीष्म ने कौरव सैनिकों का हर्ष बढ़ाते हुए कहा था कि मैं वीर संजयों की सेना तथा शाल्व देश के सैनिकों का विनाश करूँगा। उन सबके संहार का दायित्व मुझ पर है। दुर्योधन! मैं द्रोणाचार्य के बिना भी सम्पूर्ण जगत का विनाश कर सकता हूँ; अतः तुम्हें पाण्डवों से कोई भय नहीं है। भीष्म के इस कथन से तुम्हारे मन में यह धारणा बन गई है कि राज्य मुझे मिलेगा और पाण्डव महान संकट में पड़ जाएँगे।
 
Truthful and very powerful Bhishma had said to the Kaurava soldiers, increasing their happiness, that I will destroy the army of the brave Sanjayas and the soldiers of Shalva country. The responsibility of killing all of them is on me. Duryodhan! I can destroy the entire world even without Dronacharya; therefore you have no fear from the Pandavas. Due to this statement of Bhishma, you have formed the notion in your mind that I will get the kingdom and the Pandavas will fall into great trouble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)