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mahabharat 5.163.1-2: संजय कहते हैं- भरतश्रेष्ठ! दुर्योधन के उपर्युक्त वचन सुनकर महाबली अर्जुन ने क्रोध से लाल नेत्रों से शकुनिकुमार उलूक की ओर देखा। तत्पश्चात अपनी विशाल भुजा उठाकर श्रीकृष्ण की ओर देखकर कहा-॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  5.163.1-2 
संजय उवाच
दुर्योधनस्य तद् वाक्यं निशम्य भरतर्षभ।
नेत्राभ्यामतिताम्राभ्यां कैतव्यं समुदैक्षत॥ १॥
स केशवमभिप्रेक्ष्य गुडाकेशो महायशा:।
अभ्यभाषत कैतव्यं प्रगृह्य विपुलं भुजम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- भरतश्रेष्ठ! दुर्योधन के उपर्युक्त वचन सुनकर महाबली अर्जुन ने क्रोध से लाल नेत्रों से शकुनिकुमार उलूक की ओर देखा। तत्पश्चात अपनी विशाल भुजा उठाकर श्रीकृष्ण की ओर देखकर कहा-॥1-2॥
 
Sanjay says- Bharatshrestha! Hearing the above words of Duryodhana, the great Arjuna looked at Shakunikumar Uluk with his eyes red with anger. After that, raising his huge arm and looking towards Shri Krishna, he said – ॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)