Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.162.8-10: फिर उल्लू ने शेष बातें भी संजयवंश के समस्त क्षत्रिय समुदाय, यशस्वी श्रीकृष्ण तथा समस्त राजाओं की सभा को द्रुपद और विराट सहित उनके पुत्रों की उपस्थिति में बता दीं। उसने विषधर सर्प के समान कुपित हुए अर्जुन को अपने शब्दबाणों से पुनः पीड़ा पहुँचाई और दुर्योधन द्वारा कही गई सारी बातें उससे कह सुनाईं। इसके साथ ही उसने वे संदेश भी बताए जो उसने उसी रूप में श्रीकृष्ण तथा अन्य सभी लोगों को देने के लिए दिए थे। | mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सृञ्जयानां च सर्वेषां कृष्णस्य च यशस्विन:।
द्रुपदस्य सपुत्रस्य विराटस्य च संनिधौ॥ ८॥
भूमिपानां च सर्वेषां मध्ये वाक्यं जगाद ह।
उलूकोऽप्यर्जुनं भूयो यथोक्तं वाक्यमब्रवीत्॥ ९॥
आशीविषमिव क्रुद्धं तुदन् वाक्यशलाकया।
कृष्णादींश्चैव तान् सर्वान् यथोक्तं वाक्यमब्रवीत्॥ १०॥
अनुवाद
फिर उल्लू ने शेष बातें भी संजयवंश के समस्त क्षत्रिय समुदाय, यशस्वी श्रीकृष्ण तथा समस्त राजाओं की सभा को द्रुपद और विराट सहित उनके पुत्रों की उपस्थिति में बता दीं। उसने विषधर सर्प के समान कुपित हुए अर्जुन को अपने शब्दबाणों से पुनः पीड़ा पहुँचाई और दुर्योधन द्वारा कही गई सारी बातें उससे कह सुनाईं। इसके साथ ही उसने वे संदेश भी बताए जो उसने उसी रूप में श्रीकृष्ण तथा अन्य सभी लोगों को देने के लिए दिए थे।
Then the owl also told the remaining things to the entire Kshatriya community of the Sanjaya dynasty, the famous Shri Krishna and the entire assembly of kings in the presence of Drupada and Virat with their sons. He again tormented Arjuna, who was enraged like a poisonous snake, with his verbal arrows and told him everything that Duryodhan had said. Along with this, he also told them the messages that he had given to convey to Shri Krishna and all the other people in the same form. 8-10.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥