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mahabharat 5.162.54: कुरुनन्दन! आप अपने बल, पराक्रम तथा अपने समर्पित सेवकों के बल से ही कुन्तीपुत्रों को युद्ध के लिए बुलाते हैं। सब प्रकार से क्षत्रियत्व का परिचय दीजिए। 54॥   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.162.54 
आत्मवीर्यं समाश्रित्य भृत्यवीर्यं च कौरव।
आह्वयस्व रणे पार्थान् सर्वथा क्षत्रियो भव॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! आप अपने बल, पराक्रम तथा अपने समर्पित सेवकों के बल से ही कुन्तीपुत्रों को युद्ध के लिए बुलाते हैं। सब प्रकार से क्षत्रियत्व का परिचय दीजिए। 54॥
 
Kurunandan! You call upon the sons of Kunti for war only with the help of your strength and bravery and that of your devoted servants. Show Kshatriyahood in every way. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)