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mahabharat 5.162.44: अथवा यदि आप सहमत हों तो कल प्रातः सेना के प्रवेश पर मैं गाण्डीव धनुष से उसके गर्व भरे शब्दों का करारा उत्तर दूँगा; क्योंकि जो केवल शब्दों से उत्तर देते हैं, वे नपुंसक होते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.162.44 
श्वोभूते कत्थितस्यास्य प्रतिवाक्यं चमूमुखे।
गाण्डीवेनाभिधास्यामि क्लीबा हि वचनोत्तरा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अथवा यदि आप सहमत हों तो कल प्रातः सेना के प्रवेश पर मैं गाण्डीव धनुष से उसके गर्व भरे शब्दों का करारा उत्तर दूँगा; क्योंकि जो केवल शब्दों से उत्तर देते हैं, वे नपुंसक होते हैं।'
 
Or if you agree, tomorrow morning at the entrance of the army I will give a befitting reply to his boastful words with the Gandiva bow; because those who answer only in words are impotent.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)