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mahabharat 5.162.42: परंतु भगवान वासुदेव के प्रभाव और आप सबके प्रयत्नों से मैं इस सम्पूर्ण जगत् के समस्त क्षत्रियों को तुच्छ समझता हूँ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.162.42 
प्रभावाद् वासुदेवस्य भवतां च प्रयत्नत:।
समग्रं पार्थिवं क्षत्रं सर्वं न गणयाम्यहम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
परंतु भगवान वासुदेव के प्रभाव और आप सबके प्रयत्नों से मैं इस सम्पूर्ण जगत् के समस्त क्षत्रियों को तुच्छ समझता हूँ॥ 42॥
 
‘But due to the influence of Lord Vasudeva and the efforts of you all, I consider all the Kshatriyas of this entire world as nothing.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)