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mahabharat 5.162.4: भीमसेन विषैले सर्प की भाँति फुफकारते हुए गहरी साँसें लेने लगे और सिर नीचा करके तथा लाल आँखों से भगवान कृष्ण की ओर देखने लगे।   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.162.4 
अवाक्शिरा भीमसेन: समुदैक्षत केशवम्।
नेत्राभ्यां लोहितान्ताभ्यामाशीविष इव श्वसन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन विषैले सर्प की भाँति फुफकारते हुए गहरी साँसें लेने लगे और सिर नीचा करके तथा लाल आँखों से भगवान कृष्ण की ओर देखने लगे।
 
Bhimasena, hissing like a poisonous snake, drew in deep breaths and looked at Lord Krishna with his head lowered and red eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)