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mahabharat 5.162.34: हे उल्लू! तुम्हारा पापी पिता जन्म से ही प्रतिदिन हमारे प्रति क्रूर और हानिकारक होने का प्रयत्न करता रहता है॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.162.34 
जन्मप्रभृति चास्माकं पिता ते पापपूरुष:।
अहितानि नृशंसानि नित्यश: कर्तुमिच्छति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे उल्लू! तुम्हारा पापी पिता जन्म से ही प्रतिदिन हमारे प्रति क्रूर और हानिकारक होने का प्रयत्न करता रहता है॥ 34॥
 
Owl! Since birth your sinful father has been trying to be cruel and harmful to us every day.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)