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mahabharat 5.162.32: ‘यदि धृतराष्ट्र का आपसे कोई सम्बन्ध न होता, तो हमारे और कौरवों में कभी मतभेद न होता ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.162.32 
नास्माकं भविता भेद: कदाचित् कुरुभि: सह।
धृतराष्ट्रस्य सम्बन्धो यदि न स्यात् त्वया सह॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘यदि धृतराष्ट्र का आपसे कोई सम्बन्ध न होता, तो हमारे और कौरवों में कभी मतभेद न होता ॥32॥
 
‘If Dhritarashtra had no relations with you, then there would never have been a rift between us and the Kauravas. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)