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mahabharat 5.162.3: वे अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और हाथ हिलाने लगे मानो हमला करने को तैयार हों। वे ज़हरीले साँपों की तरह एक-दूसरे को बेहद गुस्से से देखने लगे।   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.162.3 
आसनेषूदतिष्ठन्त बाहूंश्चैव प्रचिक्षिपु:।
आशीविषा इव क्रुद्धा वीक्षांचक्रु: परस्परम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और हाथ हिलाने लगे मानो हमला करने को तैयार हों। वे ज़हरीले साँपों की तरह एक-दूसरे को बेहद गुस्से से देखने लगे।
 
They stood up from their seats and started waving their arms as if they were ready to attack. They looked at each other in a very angry mood like poisonous snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)