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mahabharat 5.162.13: राजन! महात्मा अर्जुन और श्रीकृष्ण के विरुद्ध आपत्तिजनक वचन सुनकर वह वीर क्रोध से आग बबूला हो गया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.162.13 
अधिक्षेपेण कृष्णस्य पार्थस्य च महात्मन:।
श्रुत्वा ते पुरुषव्याघ्रा: क्रोधाज्जज्वलुरच्युता:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजन! महात्मा अर्जुन और श्रीकृष्ण के विरुद्ध आपत्तिजनक वचन सुनकर वह वीर क्रोध से आग बबूला हो गया॥13॥
 
Rajan! Hearing the objectionable words against Mahatma Arjun and Shri Krishna, that brave man became furious with anger. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)