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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना
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श्लोक 8
श्लोक
5.161.8
द्वादशैव तु वर्षाणि वने धिष्ण्याद् विवासित:।
संवत्सरं विराटस्य दास्यमास्थाय चोषित:॥ ८॥
अनुवाद
‘बारह वर्ष तक तुम राज्य से निर्वासित होकर वन में रहे और एक वर्ष तक राजा विराट के दास बनकर रहे॥8॥
‘For twelve years you were exiled from the kingdom and lived in the forest, and for one year you had to live as the slave of King Virat.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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