Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.161.32: उन दिनों जब मैंने तुम्हें नपुंसक या नपुंसक कहा था, तो वह बात सत्य सिद्ध हुई; क्योंकि विराटनगर में वनवास के समय अर्जुन को स्त्रियों की भाँति सिर पर चोटी रखनी पड़ी थी। | mahabharat अध्याय 5.161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन दिनों जब मैंने तुम्हें नपुंसक या नपुंसक कहा था, तो वह बात सत्य सिद्ध हुई; क्योंकि विराटनगर में वनवास के समय अर्जुन को स्त्रियों की भाँति सिर पर चोटी रखनी पड़ी थी।
When I called you eunuchs or impotent in those days, it proved to be correct; because during the exile in Viratnagar, Arjun had to wear a braid on his head like women. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥