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mahabharat 5.161.3: युधिष्ठिर ने कहा, "उल्लू! तुम (बिल्कुल भी) भयभीत मत हो। शान्त रहो और मुझे लोभी एवं अदूरदर्शी दुर्योधन का अभिप्राय बताओ।"   |   mahabharat अध्याय 5.161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.161.3 
युधिष्ठिर उवाच
उलूक न भयं तेऽस्ति ब्रूहि त्वं विगतज्वर:।
यन्मतं धार्तराष्ट्रस्य लुब्धस्यादीर्घदर्शिन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "उल्लू! तुम (बिल्कुल भी) भयभीत मत हो। शान्त रहो और मुझे लोभी एवं अदूरदर्शी दुर्योधन का अभिप्राय बताओ।"
 
Yudhishthira said, "Owl! You are not afraid (at all). Be at peace and tell me the intention of the greedy and short-sighted Duryodhan."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)