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mahabharat 5.161.22: हे अल्पबुद्धि वाले मूर्ख युधिष्ठिर! युद्ध के समय जिसकी गति गंगा के वेग के समान बढ़ जाती है और जिसे पार करना असम्भव है, उस हाथी सेना के मध्य में खड़े होकर तू मुझ दुर्योधन के साथ नाना प्रकार के मनुष्यों से भरी हुई मेरी विशाल सेना के साथ युद्ध करने की इच्छा कैसे कर सकता है?॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 5.161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.161.22 
नानाजनौघं युधि सम्प्रवृद्धं
गाङ्गं यथा वेगमपारणीयम्।
मां च स्थितं नागबलस्य मध्ये
युयुत्ससे मन्द किमल्पबुद्धे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे अल्पबुद्धि वाले मूर्ख युधिष्ठिर! युद्ध के समय जिसकी गति गंगा के वेग के समान बढ़ जाती है और जिसे पार करना असम्भव है, उस हाथी सेना के मध्य में खड़े होकर तू मुझ दुर्योधन के साथ नाना प्रकार के मनुष्यों से भरी हुई मेरी विशाल सेना के साथ युद्ध करने की इच्छा कैसे कर सकता है?॥ 22॥
 
You foolish Yudhishthira of little wisdom! How can you wish to fight with me, Duryodhana, standing in the middle of the elephant army, whose speed increases like the speed of the Ganges during war and which is impossible to cross, against my huge army filled with various types of people?'॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)