श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.161.19 
कथमाभ्यामभिध्यात: संस्पृष्टो दारुणेन वा।
रणे जीवन् विमुच्येत पदा भूमिमुपस्पृशन्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यदि भीष्म और द्रोण ने किसी को मारने का निश्चय कर लिया हो अथवा युद्ध में उनके भयंकर अस्त्रों का स्पर्श हो गया हो, तो कौन पृथ्वीवासी बच सकता है?॥19॥
 
Which earth-dweller can survive if Bhishma and Drona have decided to kill him or if he has been touched by their dreadful weapons in the war?॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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