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श्लोक 5.161.19  |
कथमाभ्यामभिध्यात: संस्पृष्टो दारुणेन वा।
रणे जीवन् विमुच्येत पदा भूमिमुपस्पृशन्॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| यदि भीष्म और द्रोण ने किसी को मारने का निश्चय कर लिया हो अथवा युद्ध में उनके भयंकर अस्त्रों का स्पर्श हो गया हो, तो कौन पृथ्वीवासी बच सकता है?॥19॥ |
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| Which earth-dweller can survive if Bhishma and Drona have decided to kill him or if he has been touched by their dreadful weapons in the war?॥ 19॥ |
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