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mahabharat 5.161.18: ऐसा कौन है जो जीवित रहने की इच्छा रखता है और जो शत्रुओं का संहार करने वाले द्रोणाचार्य से युद्ध करके सकुशल घर लौट सकता है?॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.161.18 
को ह्यस्ति जीविताकाङ्क्षी प्राप्येममरिमर्दनम्।
गजो वाजी रथो वापि पुन: स्वस्ति गृहान् व्रजेत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कौन है जो जीवित रहने की इच्छा रखता है और जो शत्रुओं का संहार करने वाले द्रोणाचार्य से युद्ध करके सकुशल घर लौट सकता है?॥18॥
 
Who is there who has the desire to survive and who can fight with the slayer of enemies, Drona, and return home safely?॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)