Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.161.13-14: पार्थ! तुम अत्यंत वीर एवं पराक्रमी सूतपुत्र कर्ण, बलवानों में श्रेष्ठ शल्य तथा युद्ध में इन्द्र के समान पराक्रमी महाबली द्रोणाचार्य को पराजित किये बिना यहाँ का राज्य कैसे लेना चाहते हो? 13-14॥ | mahabharat अध्याय 5.161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूतपुत्रं सुदुर्धर्षं शल्यं च बलिनां वरम्॥ १३॥
द्रोणं च बलिनां श्रेष्ठं शचीपतिसमं युधि।
अजित्वा संयुगे पार्थ राज्यं कथमिहेच्छसि॥ १४॥
अनुवाद
पार्थ! तुम अत्यंत वीर एवं पराक्रमी सूतपुत्र कर्ण, बलवानों में श्रेष्ठ शल्य तथा युद्ध में इन्द्र के समान पराक्रमी महाबली द्रोणाचार्य को पराजित किये बिना यहाँ का राज्य कैसे लेना चाहते हो? 13-14॥
Parth! How do you want to take the kingdom here without defeating the extremely brave and brave Suta's son Karna, the best among the strong Shalya and the mighty Drona who is as powerful as Indra in battle? 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥