श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  5.160.93 
लोहाभिसारो निर्वृत्त: कुरुक्षेत्रमकर्दमम्।
पुष्टास्तेऽश्वा भृता योधा: श्वो युद्धॺस्व सकेशव:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
अब लोहे के अस्त्र-शस्त्र तैयार करने का कार्य पूर्ण हो चुका है। कुरुक्षेत्र की मिट्टी भी सूख गई है। तुम्हारे घोड़े सुगठित हैं और तुमने अपने सैनिकों की भी अच्छी व्यवस्था कर ली है; अतः कल प्रातःकाल आकर श्रीकृष्ण से युद्ध करो॥ 93॥
 
‘Now the work of preparing the iron weapons has been completed. The mud of Kurukshetra has also dried up. Your horses are well-built and you have also provided for your soldiers well; therefore, come tomorrow early in the morning and fight with Shri Krishna.॥ 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)