श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  5.160.92 
क्रोधो बलं तथा वीर्यं ज्ञानयोगोऽस्त्रलाघवम्।
इह ते दृश्यतां पार्थ युद्धॺस्व पुरुषो भव॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! यहाँ के लोग तुम्हारा क्रोध, बल, पराक्रम, विद्या और शस्त्र चलाने की चपलता देखें। युद्ध करो और अपना पुरुषार्थ दिखाओ॥ 92॥
 
Partha! Let the people here see your anger, strength, valour, knowledge and agility in using weapons. Fight and demonstrate your manliness.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)