श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  5.160.91 
अप्रियाणां च वचनं प्रब्रुवत्सु पुन: पुन:।
अमर्षं दर्शयस्व त्वममर्षो ह्येव पौरुषम्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
हम बार-बार आपसे अप्रिय वचन कहते हैं, अतः आप हम पर क्रोध प्रकट करें; क्योंकि क्रोध ही पुरुषार्थ है॥91॥
 
‘We repeatedly say unpleasant words to you. You should show your anger towards us; because anger is manliness.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)