vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना
»
श्लोक 91
श्लोक
5.160.91
अप्रियाणां च वचनं प्रब्रुवत्सु पुन: पुन:।
अमर्षं दर्शयस्व त्वममर्षो ह्येव पौरुषम्॥ ९१॥
अनुवाद
हम बार-बार आपसे अप्रिय वचन कहते हैं, अतः आप हम पर क्रोध प्रकट करें; क्योंकि क्रोध ही पुरुषार्थ है॥91॥
‘We repeatedly say unpleasant words to you. You should show your anger towards us; because anger is manliness.॥ 91॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×