श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  5.160.90 
राष्ट्रान्निर्वासनक्लेशं वनवासं च पाण्डव।
कृष्णायाश्च परिक्लेशं संस्मरन् पुरुषो भव॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! राज्य से निकाले जाने, वन में रहने और द्रौपदी के अपमान के दुःख को स्मरण करो और फिर मनुष्य बनो॥90॥
 
Son of Pandu! Remember the pain of being exiled from the kingdom, of being in the forest and of the insult to Draupadi and then become a man.॥ 90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)