श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  5.160.89 
द्वादशैव तु वर्षाणि वने धिष्ण्याद् विवासित:।
संवत्सरं विराटस्य दास्यमास्थाय चोषित:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
‘बारह वर्ष तक तुम अपने राज्यसे निर्वासित होकर वन में रहे और एक वर्ष तक तुम्हें विराटका दास बनकर रहना पड़ा ॥ 89॥
 
‘For twelve years you were exiled from your kingdom and lived in the forest, and for one year you had to live as Virat's slave.॥ 89॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)