श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  5.160.88 
पराजितोऽसि द्यूतेन कृष्णा चानायिता सभाम्।
शक्योऽमर्षो मनुष्येण कर्तुं पुरुषमानिना॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
‘आप जुए में हार गए और आपकी पत्नी द्रौपदी को राजसभा में लाया गया। कोई भी पुरुष जो खुद को पुरुष समझता है, इन बातों पर बहुत क्रोधित हो सकता है।
 
‘You were defeated in gambling and your wife Draupadi was brought to the court. Any man who considers himself a man can be very angry about these things.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)