Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.160.83-84h: जिन उद्देश्यों के लिए एक क्षत्राणी पुत्र को जन्म देती है, उन सबकी पूर्ति का समय आ गया है। अपना बल, पराक्रम, महान साहस, शस्त्र चलाने में निपुणता और युद्ध में पराक्रम दिखाकर (हम पर प्रयोग करके) अपने बढ़े हुए क्रोध को शांत करो। | mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदर्थं क्षत्रिया सूते सर्वं तदिदमागतम्।
बलं वीर्यं च शौर्यं च परं चाप्यस्त्रलाघवम्॥ ८३॥
पौरुषं दर्शयन् युद्धे कोपस्य कुरु निष्कृतिम्।
अनुवाद
जिन उद्देश्यों के लिए एक क्षत्राणी पुत्र को जन्म देती है, उन सबकी पूर्ति का समय आ गया है। अपना बल, पराक्रम, महान साहस, शस्त्र चलाने में निपुणता और युद्ध में पराक्रम दिखाकर (हम पर प्रयोग करके) अपने बढ़े हुए क्रोध को शांत करो।
The time has come to fulfill all the purposes for which a Kshatrani gives birth to a son. By showing your strength, valour, great courage, agility in handling weapons and valour in the war, calm down your increased anger (by using it on us). 83 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥