श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 8-10h
 
 
श्लोक  5.160.8-10h 
यदेतत् कत्थनावाक्यं संजयो महदब्रवीत्॥ ८॥
वासुदेवसहायस्य गर्जत: सानुजस्य ते।
मध्ये कुरूणां कौन्तेय तस्य कालोऽयमागत:॥ ९॥
यथा व: सम्प्रतिज्ञातं तत् सर्वं क्रियतामिति।
 
 
अनुवाद
‘कुन्तीकुमार युधिष्ठिर! श्रीकृष्ण की सहायता से आपने अपने भाइयों सहित गर्जना करके संजय से आत्मप्रशंसा की थी और संजय ने कौरवों की सभा में उसे अतिशयोक्तिपूर्वक सुनाया था। अब उसे सत्य सिद्ध करने का समय आ गया है। आपने जो वचन दिए हैं, उन्हें पूर्ण कीजिए।’॥8-9 1/2॥
 
‘Kuntikumar Yudhishthira! With the help of Shri Krishna, you had roared along with your brothers and said self-praises to Sanjaya and Sanjaya had narrated them in a very exaggerated manner in the assembly of the Kauravas. This is the time to prove them true. Fulfill all the promises you have made.’॥ 8-9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)